गुरुवार, 26 फ़रवरी 2015

प्रथम विश्व युद्ध के शहीदों की शहादत को याद रखेगा भारत

कविता जोशी.नई दिल्ली

वर्ष 2015 का आगाज इतिहास की बेहद धुंधली पड़ चुकी प्रथम विश्व युद्ध की उस पुरातन स्मृति के साथ होने जा रही है जिसे हममें से कई भूला चुके हैं और कईयों को इसके बारे में जानकारी भी ना हो। लेकिन नए वर्ष में संपूर्ण दुनिया प्रथम विश्व युद्ध के 100 वर्ष पूरे होने की याद में अलग-अलग प्रकार के आयोजन करेगी। भारत भी इन आयोजनों में शरीक होगा। देश में 9 से 14 मार्च तक प्रथम विश्व युद्ध में भारतीयों द्वारा दी गई शहादत और युद्ध से जुड़ी अन्य स्मृतियों को लेकर कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

रक्षा मंत्रालय के विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अगले महीने 9 मार्च से देश में इससे जुड़े कार्यक्रमों की शुरूआत हो जाएगी। 9 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजधानी में इंडिया गेट स्थित अमर जवान ज्योति पर युद्ध में शहादत देने वाले वीरों को श्रद्धांजलि देंगे। यहां बता दें कि इंडिया गेट 1931 में अंग्रेजों द्वारा उद्घघाटित देश का पहला युद्ध स्मारक है, जिसमें प्रथम विश्व युद्ध और तीसरे अफगान युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों की याद में बनाया गया। उस समय यह सैनिक रॉयल ब्रिटिश सेना का हिस्सा थे। स्मारक का निर्माण 1921 तक पूरा हो गया था।

सूत्र ने कहा कि इस अवसर पर देश भर में समारोह और कार्यक्रम होंगे। इस बात की भी संभावना है कि 10 मार्च को राष्टÑपति प्रणब मुखर्जी तीन मूर्ति पर शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे। राजधानी दिल्ली के मॉनेक्शा सेंटर में प्रथम विश्व युद्ध की याद में एक प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। आधिकारिक रूप से प्रथम विश्व युद्ध की लड़ाई का शंखनाद यूरोप से 28 जुलाई 1914 को हुआ और इसका समापन 11 नवंबर 1918 को हुआ। 1914 में जब लड़ाई शुरू हुई तब भारतीय सेना अंग्रेजों के अधीन थी। इंडिया गेट स्मारक का निर्माण एक अंग्रेज अधिकारी एडवर्ड लुटियन्स ने कराया था। यह स्मारक पेरिस के आर्क डेट्रॉयम्फ से प्रेरित है।

गौरतलब है कि प्रथम विश्व युद्ध में भारत की ओर से 1.5 मिलियन भारतीय सैनिक शामिल हुए थे। इसमें 74 हजार सैनिकों ने अपनी जान गंवाई। युद्ध में सेना की 12 कैवलरी रेजीमेंट और 13 इंफेंट्री रेजीमेंट ने भाग लिया था। इंडिया गेट पर भारतीय सेनाओं के शहीदों के लिए, जो फ्रांस और फ्लैंडर्स, मेसोपोटामिया, फारस, पूर्वी अफ्रीका, गैलीपोली और निकटपूर्व एवं सुदूरपूर्व की अन्य जगहों पर शहीद हुए के नाम दर्ज हैं। साथ ही उनके नाम भी नाम दर्ज हैं जो तीसरे अफगान युद्ध में भारत या उत्तर-पश्चिमी सीमा पर मारे गए।

देश की आजादी के बाद इंडिया गेट भारतीय सेना के अज्ञात सैनिकों के मकबरे की साइट बनकर रह गया है। इसकी मेहराब के नीचे अमर जवान ज्योति स्थापित कर दी गई है। अनाम सैनिकों की स्मृति में यहां एक राइफल के ऊपर सैनिक की टोपी सजा दी गई है, जिसके चारों कोनों पर सदैव एक ज्योति जलती रहती है। अमर जवान ज्योति पर हर साल प्रधानमंत्री व तीनों सेनाध्यक्ष पुष्पचक्र चढ़ाकर अपनी श्रंद्धाजलि अर्पित करते हैं। इंडिया गेट की दीवारों पर हजारों शहीद सैनिकों के नाम खुदे हुए हैं।

1 टिप्पणी:

  1. ‘ब्लॉग बुलेटिन’ की ११५०वीं पोस्ट आइये संकल्पित हों अपने जाँबाज़ सैनिकों के लिए - ११५०वीं बुलेटिन में आपकी इस पोस्ट को शामिल किया गया है. आपके सादर संज्ञान की तथा स्नेहिल सहयोग कि सदैव अपेक्षा रहेगी.. आभार...

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