शनिवार, 13 जून 2015

मोदी सरकार के सालाना जश्न में शामिल होंगी ईरानी?

कविता जोशी.नई दिल्ली

नरेंद्र मोदी की अगवाई वाली राजग सरकार को 26 मई को एक साल पूरा होने के मौके पर सरकार के मंत्री 365 दिनों के कामकाज और उपलब्धियों के बारे में जनता को जागरूक करेंगे। लेकिन मोदी केबिनेट की हिस्सा और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी इस सालाना जश्न में शामिल होंगी या नहीं इस पर सस्पेंस बना हुआ है। शुक्रवार को सरकार के वार्षिक जश्न को लेकर आमजन को जागरूक करने का आगाज केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कर दिया है। लेकिन अब तक एचआरडी मंत्रालय की ओर से स्मृति ईरानी की मौजूदगी को लेकर कोई आधिकारिक सहमति केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (आईएनबी) को नहीं भेजी गई है। दरअसल सूचना-प्रसारण मंत्रालय इस पूरे कार्यक्रम का खाका तैयार करने से लेकर इसकी निगरानी भी कर रहा है।

क्यों नहीं जाएंगी ईरानी?
इस बाबत जब हरिभूमि ने एचआरडी मंत्रालय में पड़ताल की तो पता चला कि मई महीने की शुरूआत में सालाना जश्न के कार्यक्रम को लेकर जब आईएनबी मंत्रालय द्वारा केंद्रीय मंत्रियों की जो सूची तैयार की गई थी उसमें ईरानी का नाम केंद्रीय उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमन के साथ 28 मई टाकथॉन के लिए शामिल किया गया था। इसमें दोनों मंत्रियों को सोशल मीडिया के ट्विटर और यू-ट्यूब जैसे माध्यमों के जरिए सरकार की सालाना उपलब्धियों के बारे में लोगों को बताना था। लेकिन बाद में ईरानी का नाम सूची से हटाने की भी बात सामने आई थी। लेकिन कुछ दिन पहले फिर से आईएनबी मंत्रालय ने एचआरडी मंत्रालय के अधिकारियों को फोन करके ईरानी का नाम सूची में बरकरार होने की बात कही है और उन्हें मंत्री की उपस्थिति को आधिकारिक मंजूरी देने को कहा गया है।

विदेश में हैं स्मृति
इस वक्त मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी यूनेस्को के एक अंतरराष्टÑीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन और दक्षिण.कोरिया के दौरे पर हैं। उनकी इस यात्रा की शुरूआत 18 मई से हुई थी और इसका समापन 25 मई को होगा। मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि 25 मई को जब मंत्री स्वदेश वापस लौटेंगी तो उन्हें आईआईटी खड़गपुर के दौरे पर भी जाना है। ऐसे में सालाना जश्न में उनकी उपस्थिति होगी या नहीं पर संदेह बना हुआ है। लेकिन सूची में उनका नाम तो बना हुआ है।

विवाद तो नहीं वजह
मंत्रालय में यह चर्चा भी चल रही है कि सरकार सालाना जलसे के मौके पर अपनी कामकाजी यानि विकासवादी छवि और प्रमुख उपलब्धियों को लेकर जनता के बीच जाना चाहती है। जिन केंद्रीय मंत्रियों को इस कार्य का जिम्मां सौंपा गया है उनके मंत्रालयों की छवि, कामकाज विकास और उपलब्धियों दोनों के पैमाने पर खरा उतरना चाहिए। इस पैमाने पर एचआरडी मंत्रालय की स्थिति संदेहपूर्ण है। मंत्रालय आए दिन कुछ न कुछ विवादों को लेकर चर्चा में रहता है।

गए थे एवरेस्ट फतह करने, हो गई अच्छी-खासी मानव सेवा

नेपाल में आए भूकंप से एक अप्रैल को दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट फतेह करने निकली भारतीय सेना क ी 30 पर्वतरोहियों की टुकड़ी को नेपाल जाकर चोटी फतह करना तो नसीब नहीं हुआ। लेकिन भूकंप से इस ऊंची चोटी के बेस कैंप में मची तबाही ने टीम को मानव सेवा का सुनहरा अवसरा मुहैया करा दिया। मंगलवार 19 मई को यह दल नेपाल से वापस भारत पहुंचा है।

यहां राजधानी में मौजूद थलसेना के सूत्रों ने बताया कि 26 अपै्रल को जब नेपाल में 7.9 तीव्रता का भूकंप आया तो उसके बाद एवरेस्ट के बेस कैंप पर एक के बाद एक कई बर्फील तूफान आए। जिसने कैंप को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया था। इस तरह की आपदा से निपटने में सक्षम सैन्य पर्वतारोहियों के दल ने अपने आप को सुरक्षित बचा लिया और जैसे ही तूफान थमा तो यह लोग कैंप में मौजूद लोगों की तीमारदारी में जुट गए। टीम की अगुवाई कर रहे मेजर रनवीर सिंह जामवल ने कहा कि बर्फीले तूफान के वक्त स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण हो गई थी। क्योंकि एक ओर बर्फ पश्चिम में और दूसरी ओर नुप्त्से की ओर से सीधे बेस कैंप की ओर तेजी से आ रही थी। ऐसे में हमारी टीम के लिए सुरक्षित जगह पर जाना मुश्किल हो रहा था। यहां तक कि बर्फ की परत लगातार हिल रही थी। जिसमें सीधे खड़ा होना भी बड़ी चुनौती से कम नहीं था।

बेस कैंप में दर्दनाक नजारा था। चारों ओर टूटे हुए टेंट, मदद को पुकारते घायल लोग दिखायी दे रहे थे। इतना ही नहीं कुछ कैंप तो पूरी तरह से तूफान के साथ बह गए थे। सेना का कैंप उसमें शामिल था। बर्फ का जो हिस्सा टूटकर बेस कैंप की ओर आया था उसने करीब दो-तिहाई बेस कैंप को अपनी जद में लेकर उसे पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया था। इसमें करीब 19 पर्वतारोहियों की मौत हो गई और करीब 80 पर्वतारोही और शेरपा घायल हुए।

मुश्किल घड़ी में सेना के पर्वतारोही दल में शामिल मेडिकल अधिकारी मेजर रितेश गोयल ने पीड़ितों की प्राण रक्षा का जिम्मा उठाया। उन्होंने न केवल घायलों का प्राथमिक उपचार किया। बल्कि 70 पर्वतारोहियों का उपचार कर उन्हें नॉर्मल किया। कुछ के पांव टूटे हुए थे तो कुछ के हाथ। इसके अलावा कुछ लोगों को सिर पर गंभीर चोटें आयी थीं। राहत कार्य खत्म होने के बाद टीम ने निर्णय लिया कि वो चोटी पर चढ़ाई नहीं करेगी। लेकिन उसे साफ करने का जिम्मा उठाएगी।

 एक बार फिर मेजर जांमवाल के नेतृत्व में टीम ने चार दिनों तक एवरेस्ट के पूर्वी ओर खुंबू ग्लेशियर को साफ किया। इसमें नुप्त्से बेस तक बड़ी मात्रा में इकट्टा हुए मलबे को हटाया। दल ने 3 हजार किग्रा. कचरा एकट्टा करके नेपाल की सागरमाथा प्रदूषण नियंत्रण समिति को सौंपा। 4 मई को सेना का यह दल अंतिम दल था जिसने बेस कैंप छोड़ा। लेकिन इसके बाद यह लोग नामचे बाजार में रूके और वहां के नामचे डेंटल क्लिनिक को बचाने और स्थानांतरित करने में मदद पहुंचाई। 12 मई को जब नेपाल में भूकंप के दुबारा झटके आए तो सेना का यह दल वहां स्थानीय लोगों का मानसिक मनोबल बढ़ाने में जुटा रहा।

जम्मू-कश्मीर में सेना की तैयारियों की समीक्षा करेंगे पर्रिकर

कविता जोशी.नई दिल्ली

एक ओर भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा (एलओसी) के उस पार पाक समर्थित आतंकवादी जम्मू-कश्मीर को दहलाने की साजिश रच रहे हैं, वहीं दूसरी ओर देश के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर सूबे में सेना की सैन्य-रणनीतिक तैयारियों की समीक्षा करने जा रहे हैं। यहां रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि रक्षा मंत्री 22 मई से जम्मू-कश्मीर के दो दिवसीय दौरे पर जाएंगे। इसमें सेनाप्रमुख जनरल दलबीर सिंह सुहाग भी उनके साथ जाएंगे।

सूत्र ने कहा कि रक्षा मंत्री के दौरे की शुरूआत भारत की सरहदों से चीन की निगरानी करने वाली 14वीं कोर के दौरे से होगी। इसके लिए 22 मई को पर्रिकर लेह जाएंगे। लेह में रक्षा मंत्री को 14वीं कोर के मुखिया (कोर कमांडर) ले.जनरल बी.एस.नेगी सैन्य तैयारियों के बारे में जानकारी देंगे। इसके बाद पर्रिकर श्रीनगर के लिए रवाना होंंगे। यहां सेना की 15वीं कोर के कमांडर ले.जनरल सुब्रत साहा कोर की सैन्य और रणनीतिक तैयारियों के बारे में रक्षा मंत्री को अवगत कराएंगे। अंत में रक्षा मंत्री नगरोटा स्थित सेना की 16वीं कोर का दौरा करेंगे जहां उन्हें राज्य में फैली सेना उत्तरी-कमांड के मुखिया ले.जनरल डी.एस.हुड्डा और 16 कोर के कमांडर ले.जनरल के.एच.सिंह सेना की तैयारियों से जुड़े छोटे-बड़े पहलू के बारे में बताएंगे। रक्षा मंत्री की योजना इस दौरे में जम्मू जाने की भी है।

सूत्र ने कहा कि पर्रिकर अपने दौरे में सेना की तीनों कोरों के अलावा दुर्गम जगहों पर स्थित सेना की कुछ फॉरवर्ड पोस्ट भी देखेंगे और जवानों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन करेंगे। यह भी जानकारी मिल रही है कि रक्षा मंत्री की सूबे के मुख्यमंत्री मुμती मोहम्मद सईद से मुलाकात हो सकती है। बीते वर्ष नवंबर में रक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभालने के बाद रक्षा मंत्री दूसरी बार जम्मू-कश्मीर के दौरे पर जा रहे हैं।

सेना की तैनाती के लिहाज से जम्मू-कश्मीर बेहद संवेदनशील राज्य माना जाता है। यहां सेना की 3 कोर लगभग ढाई लाख फौज के साथ पाकिस्तानी और चीनी खतरे से मुकाबला करने के लिए दिन-रात मुस्तैद है। गौरतलब है कि रक्षा मंत्री का यह दौरा हाल में खुफिया ब्यूरो की रिपोर्ट आने के तुरंत बाद हो रहा है, जिसमें यह कहा गया था कि पाक अधिकृत कश्मीर में लश्करे तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिद्दीन के लगभग 200 आतंकी विशेष प्रशिक्षण ले रहे हैं। आतंकियों को राज्य में आतंक मचाने के लिए प्रमुख सरकारी और सैन्य प्रतिष्ठानों के नक्शों और वीडियो दिखाकर ट्रेंड किया जा रहा है। आतंकी आने वाले दिनों में किन जगहों से घुसपैठ कर सूबे की शांति भंग करेंगे उसका ब्लूप्रिंट भी उन्होंने तैयार कर लिया गया है। यहां बता दें कि इस बाबत ‘दो सौ आतंकी ले रहे ट्रेनिंग’ शीर्षक से खबर को हरिभूमि ने 20 मई को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।

.....तो अब हाइवे पर भी लैंड करेंगे लड़ाकू विमान

कविता जोशी.नई दिल्ली

अब तक आपने वायुसेना के लड़ाकू विमानों को अपने हवाईअड्डों से उड़ान भरने और लैंड करने की खबरें सुनी होगी। लेकिन बृहस्पतिवार को बल के एक लड़ाकू विमान मिराज-2000 ने यमुना एक्सप्रेस-वे पर सफलतापूर्वक लैंड कर एक नया इतिहास रच दिया। यहां राजधानी में मौजूद वायुसेना के सूत्रों ने बताया कि मिराज विमान के साथ पायलट विंग कमांडर प्रशांत अरोड़ा ने वायुसेना के ग्वालियर एयरबेस (वायुसेना की केंद्रीय कमांड का हिस्सा) से सुबह 6 बजकर 25 मिनट पर उड़ान भरी और इसके ठीक 15 मिनट बाद विमान ने 6 बजकर 40 मिनट पर यमुनाएक्सप्रेस-वे पर लैंड किया।

लैडिंग से पूर्व ली अनुमति
एक्सप्रेस-वे पर मिराज विमान की लैडिंग के लिए वायुसेना ने उत्तर-प्रदेश सरकार के अलावा आगरा और मथुरा के जिलाधिकारी, एसपी, यमुना एक्सप्रेस- वे प्राधिकरण, स्थानीय पुलिस और जेपी एंफ्राटेक से अनमुति ली थी। वायुसेना की योजना भविष्य में अन्य हाइवे की पट्टियों को भी इस तरह से विकसित करने की है, जिसके बाद वहां से भी लड़ाकू विमानों को लैंड कराया जा सके।

ऐसे हुई लैंडिंग
मिराज-2000 विमान ने यमुना एक्सप्रेस-वे पर लैंड करने से पहले अपनी ऊंचाई को करके 100 मीटर पर ला दिया और उसके बाद हाइवे पर तैयार की गई पट्टी पर इसे उतारा गया। यह विमान वायुसेना के बेड़े में शामिल पुराने मिराज-2000 विमानों में से ही एक है। हाल ही में वायुसेना को फ्रांस से 2 उन्नत मिराज-2000 विमान भी मिले हैं, जिनकी तैनाती भी ग्वालियर एयरबेस में ही है। इस वक्त वायुसेना के पास करीब 64 मिराज-2000 विमान हैं, जिनका उन्नतीकरण किया जाना है। लैडिंग से पहले एहतियात जरूरी मिराज या ऐसे अन्य लड़ाकू विमान उतारने से पहले कई एहतियाती कदम वायुसेना को उठाने पड़ते हैं। इसमें हाइवे का लगभग 5 किमी. का इलाका आगे और पीछे पूरी तरह से खाली कर दिया जाता है। इस दौरान लड़ाकू विमान की लैडिंग के समय गति करीब 200 किमी. होती है। वायुसेना लैडिंग साइट यानि हाइवे की पट्टी की चौड़ाई सीधी होनी चाहिए। इसके आसपास किसी तरह की कोई रिहाइश, बिल्डिंग या आबादी न हो, कोई खंबा, पेड़ और साइकिल लेन नहीं होनी चाहिए। वायुसेना के आगरा हवाईअड्डे से मिराज विमान की लैडिंग के लिए तमाम सुरक्षा संबंधी इंतजाम किए गए। विभिन्न स्थानीय एजेंसियों से अनुमति ली गई।

कई देश हैं ऐसी लैडिंग में सक्षम
भारत में लड़ाकू विमानों को हाइवे पर लैंड कराने की शुरूआत आज हुई है। लेकिन दुनिया के विकसित और विकासशील देशों में यह प्रक्रिया लंबे समय से प्रयोग में लायी जाती रही है। इस क्लब में अमेरिका, ब्रिटेन, स्वीडन, चीन, पाकिस्तान, सिंगापुर, ताइवान जैसे देश शामिल हैं। रक्षा संबंधी जानकार कहते हैं कि इस तरह की लैडिंग की सुविधा युद्ध जैसी आपात स्थिति में खासकर तब बेहद मददगार होती है, जब दुश्मन हवाई हमलों के जरिए हमारे हवाईअड्डों को नष्ट कर दें या उन्हें गंभीर नुकसान पहुंचाए।

तो सतबीर बेदी ही होंगी सीबीएसई की चेयरमैन!

बीते कुछ महीनों से खाली केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को उसका नया चेयरमैन जल्द ही मिल सकता है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय में सीबीएसई चेयरमैन की नियुक्ति को लेकर जरूरी सारी प्रक्रिया पूरी कर ली है। अब अधिकारी के नामभर का ऐलान होना ही बाकी है। मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि सीबीएसई चेयरमैन के पद को लेकर कई लोगों ने आवेदन किया था। लेकिन इस दौड़ में सबसे आगे डॉ.सतबीर बेदी का नाम चल रहा है। इस बात पुख्ता संभावना जताई जा रही है कि डॉ.बेदी को ही सीबीएसई का अगला चेयरमैन नियुक्त किया जाएगा। मंत्रालय की ओर से डॉ.बेदी का नाम जल्द ही कै बिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) को भेजा जा सकता है।

डॉ.बेदी फ्रंटरनर
सीबीएसई चेयरमैन को लेकर एचआरडी मंत्रालय ने बीते अप्रैल महीने में नियुक्ति प्रक्रिया की शुरूआत की थी। मंत्रालय के पास इसे लेकर 59 आवेदन आए थे। इसमें से कुल 18 प्रत्याशियों के नामों को शार्टलिस्ट किया गया। इस दौड़ में डॉ.बेदी का नाम सबसे ऊपर बताया जा रहा है। यहां बता दें कि डॉ.बेदी अभी एचआरडी मंत्रालय में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग में संयुक्त सचिव हैं और सीबीएसई चेयरमैन का कामकाज अस्थायी तौर पर संभाल भी रही हैं। डॉ.बेदी 1986 बैच की यूटी कैडर की आईएएस अधिकारी हैं।

बीते दिसंबर से खाली है पद
सीबीएसई चेयरमैन का पद बीते वर्ष दिसंबर महीने से खाली है। दिसंबर में ही विनीत जोशी ने सीबीएसई चेयरमैन के रूप में अपना बढ़ा हुआ कार्यकाल पूरा किया था। उसके बाद नए चेयरमैन की नियुक्ति को लेकर सरकार के स्तर पर कवायद तेज हुई। दिसंबर में ही मंत्रालय की ओर से डॉ.बेदी को सीबीएसई का कार्यकारी चेयरमैन नियुक्त किया गया था।

हमारी कार्रवाई से डरकर प्रतिक्रिया दे रहा पाक: पर्रिकर


रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने बृहस्पतिवार को कहा कि पाकिस्तान, भारतीय सेना द्वारा म्यांमार की सीमा में घुसकर आतंकी कैंपों को तबाह करने की कार्रवाई से डर गया है, इसलिए ऐसी प्रतिक्रिया दे रहा है। यहां राजधानी में एक सेमिनार को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि जब सोच के तरीके में बदलाव आता है, तब कई चीजें बदल जाती हैं। आपने पिछले दो-तीन दिनों में ऐसा देखा है। म्यांमार में उग्रवादियों के खिलाफ की गई हमारी सेना की एक कार्रवाई ने पूरे देश में सुरक्षा परिदृश्य के बारे में सोच को बदल दिया है। रक्षा खरीद प्रक्रिया के सरलीकरण की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त करते हुए पर्रिकर ने कहा कि इस बारे में सोच में बदलाव की जरूरत है।

म्यांमार में सेना द्वारा चलाए अभियान का विस्तृत ब्यौरा देने से इंकार करते हुए कहा कि जो लोग हमारे रुख से भयभीत हुए हैं उन्होंने प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है। गौरतलब है कि भारतीय सेना ने म्यांमार के अधिकारियों की जानकारी में सफल कार्रवाई में करीब 40 उग्रवादियों को मार गिराया। यह वही आतंकी थे जो 4 जून को मणिपुर के चंदेल में भारतीय सेना के काफिले पर हमला करने के लिए जिम्मेदार थे। चार जून को किए गए हमले में सेना के 18 जवान शहीद हो गए थे।

भारतीय सेना द्वारा चलाए गए इस अभियान के बाद पाकिस्तान के गृह मंत्री निसार अली खान ने कहा था कि पाकिस्तान, म्यांमार की तरह नहीं है। भारत हमें म्यांमार समझने की गलती न करे। इसके अलावा उन्होंने धमकी भरे लहजे में कहा कि उनका देश सीमापार से आ रही धमकी से न ही डरेगा और न ही उसके सामने झुकेगा। पाकिस्तानी मंत्री का यह बयान सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर के उस बयान के बाद आया था जिसमें उन्होंने कहा था कि मणिपुर में 18 सैनिकों को मारने वाले उग्रवादियों के खिलाफ म्यांमार में की गई कार्रवाई अन्य पड़ोसी देशों के लिए संदेश है। राठौर की यह टिप्पणी पाकिस्तान को चेतावनी के लहजे में कही गई। खान ने कहा कि भारत के सामने यह स्पष्ट हो जाना चाहिए कि पाकिस्तान, म्यांमार जैसा देश नहीं है। जिनकी पाक के खिलाफ बुरी सोच है, उन्हें यह ध्यान में रखना चाहिए कि पाकिस्तानी सेना इस तरह की किसी भी कार्रवाई का उसी अंदाज में जवाब देने में सक्षम है।

रविवार, 17 मई 2015

पर्रिकर ने तेजपुर में सेना की रणनीतिक तैयारियों की समीक्षा की

हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली

रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के उत्तर-पूर्व के दौरे की शुक्रवार को आधिकारिक शुरूआत हो गई। वहां पहुंचने पर सबसे पहले उन्होंने थलसेना की पूर्वी कमांड के प्रमुख लेफ्टीनेंट जनरल एमएमएस राय और तेजपुर में पड़ने वाली चौथी कोर के कमांडर ले जनरल शरत चंद से मुलाकात की। दोनों अधिकारियों ने रक्षा मंत्री को पूर्वोत्तर में सेना की सैन्य-रणनीतिक तैयारियों और चुनौतियों के बारे में विस्तार से रूबरू कराया। रक्षा  मंत्री के साथ उनके दो दिवसीय पूर्वोत्तर दौरे में गृह राज्य मंत्री किरिन रिजिजू भी गए हैं। शुक्रवार को ही चीन से लगी पश्चिमी-सीमा के चुशूल पर चीनी सेना के अधिकारियों ने सेना के अधिकारियों के साथ अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के मौके पर मुलाकात की।

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि शनिवार को रक्षा मंत्री अरूणाचल-प्रदेश के तवांग के लिए रवाना होंगे। तवांग उनके दौरे का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। क्योंकि सामरिक-रणनीतिक लिहाज यह सेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण ठिकाना है। पर्रिकर तवांग युद्ध स्मारक देखेंगे और सेना की वास्तविक नियंत्रण रेखा के बेहद करीब पड़ने वाली फॉरवर्ड पोस्ट भी जाकर जवानों से मुलाकात करेंगे। रक्षा मंत्री का बूमला जाने का भी कार्यक्रम है।

यहां बता दें कि बूमला भारत और चीन के बीच उत्तर-पूर्व में पड़ने वाला बॉर्डर पर्सनल मीटिंग (बीपीएम) करने का स्थान है। यहां सालाना मौकों से लेकर सीमा पर एक-दूसरे के साथ विवाद की स्थिति में भी बैठक की जाती है। यहां से रक्षा मंत्री ईटानगर के लिए रवाना होंगे और वहां अरूणाचल-प्रदेश के गर्वनर से लेफटीनेंट जनरल निर्भय शर्मा से मुलाकात करेंगे। इसके बाद वो जोरहाट होते हुए दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे। उधर लद्दाख के चुशूल में दोनों सेनाओं के बीच हुई बीपीएम की बैठक में सीमा पर शांति और सौहार्द बनाए रखने पर जोर दिया गया। विवादपूर्ण स्थितियों का हल बातचीत से निकालने पर जोर दिया गया। बैठक में भारत की ओर से ब्रिगेडियर जेके.एस विजिसविक्र के नेतृत्व में सैन्य अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने अपने चीनी समकक्ष वरिष्ठ कर्नल फैं्र नजुन की अगुवाई वाले प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की।

पूर्वोत्तर में सेना-वायुसेना के ठिकाने
पूर्वोत्तर में थलसेना की पूर्वी कमांड है, जिसका मुख्यालय पश्चिम-बंगाल में है। इस कमांड के तहत तीन अहम रणनीतिक कोर आती हैं। इनमें 3, 4 और 33 कोर चीनी खतरे से सीधे मुकाबले के लिए तैनात की गई हैं। आंकड़ों के हिसाब से यह करीब ढाई लाख फौज होती है। 3 कोर का मुख्यालय नागालैंड के दीमापुर में है, 4 कोर का मुख्यालय असम के तेजपुर में और 33 कोर का मुख्यालय पश्चिम-बंगाल के सिलिगुड़ी में है। पूर्वोत्तर में वायुसेना की पूर्वी कमांड भी तैनात है। इसमें तवांग में हेलिकॉप्टरों के उतरने के लिए हैलीपैड है। तेजपुर, जोरहाट में एयरफील्ड है और रंगिया में हैलिपैड है। यह वो इलाके हैं जहां रक्षा मंत्री अपनी यात्रा के दौरान जाएंगे।

पूर्वोत्तर में कमजोर है भारत?
पूर्वोत्तर में चीन से लगी सीमा पर अगर दोनों देशों के बीच सैन्य-रणनीतिक स्तर पर तुलना की जाए तो भारत के मुकाबले चीन बेहतर स्थिति में है। भारत की यहां सेना की 3 कोर और 10 डिवीजन तैनात हैं। इस आंकड़ें में लद्दाख की एक डिवीजन भी शामिल है। इसकी तुलना में अगर लड़ाई के हालात बनते हैं तो चीन एकसाथ लद्दाख से लेकर अरूणाचल सीमा तक अपनी सेना की कुल 32 डिवीजन ला सकता है। चीन का रेल-रोड़ संपर्क भारत की मुकाबले कई गुना सुदृढ़ है। जबकि हमारा निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है।